प्रहलाद चा के अभिनय के इर्द गिर्द घूमती पंचायत 3

वैसे तो तो पंचायत वेब सीरीज ने यह जाता दिया है कि अगर स्क्रिप्ट आपकी बेहतरीन हो और उसपर एक्टिंग की मुहर लग जाए तो गुड लुकिंग होना बहुत पीछे छूट आता है। हीरो या नायक कह लीजिए हमेशा से गुड लुकिंग के मिथक से जोड़कर ही देखा जाता है पर प्रह्लाद चा उर्फ फैसल मलिक और विनोद मतलब अशोक पाठक दोनो ही राष्ट्रीय ड्रामा स्कूल के विद्यार्थी है।

वैसे तो तो पंचायत वेब सीरीज ने यह जता दिया है कि अगर स्क्रिप्ट आपकी बेहतरीन हो और उसपर एक्टिंग की मुहर लग जाए तो गुड लुकिंग होना बहुत पीछे छूट आता है। हीरो या नायक कह लीजिए हमेशा से गुड लुकिंग के मिथक से जोड़कर ही देखा जाता है पर प्रह्लाद चा उर्फ फैसल मलिक ने यह मायाजाल तोड़ दिया है। राष्ट्रीय ड्रामा स्कूल के विद्यार्थी जैसे प्रधान जी रघुवीर यादव, बनराकस दुर्गेश कुमार और विधायक जी पंकज झा से सजे इस सीरीज में एक्टिंग का एक से एक फ्लेवर देखने को मिलता है।

पंचायत सीजन 3 में प्रहलाद पांडेय उर्फ प्रहलाद चा, फैसल मलिक द्वारा अभिनीत, दर्शकों को भावनात्मक रूप से झकझोर देता है। हास्य से भरपूर पिछले सीजनों के बाद, इस सीजन में प्रहलाद के जीवन में एक अकेलापन निहित है। इनका अभिनय कई बार दर्शकों के गले को भर देता है। यह सच है कि उन्हें गाँव वालों से बहुत प्यार और सम्मान मिला, लेकिन व्यक्तिगत मोर्चे पर उन्हें सब कुछ अधूरा सा ही लगता है। एक दृश्य में, प्रहलाद कहते है कि, "अम्मा, मैं आपको अपने घर इसलिए ले आया। कैसा लगता है? बिलकुल खाली।" और फिर वह फूट-फूट कर रोने लगते हैं। यह दृश्य दर्शकों को प्रहलाद के अकेलेपन की गहराई का अहसास कराता है और उसके कोमल हृदय की एक झलक दिखाता है।

पंचायत 3 का इंतजार हर उस शख्स को था जिसने अपने जीवन में गांव, उसकी चुनौतियों और प्रधानी के चुनावों की चकल्लस का अनुभव किया है। मगर दर्शकों का एक वर्ग ऐसा भी था जो सिर्फ़ मनोरंजन की तलाश में था, उनके लिए सीरीज़ का मतलब था एक बार शुरू करना और खत्म करके ही उठना। इस तरह अपने दर्शक वर्ग को बांधती है यह सीरीज। देसी बोली, ठेठ अंदाज में लिखे गए संवाद दर्शक वर्ग को समान पृष्ठभूमि पर लाकर खड़ा कर देते। बैकग्राउंड गीत संगीत इतना करीने से सजाया गया है मानो स्क्रीन पर चल रहे चलचित्र में वह जान फूंक देता है।

फैसल मलिक के असाधारण प्रदर्शन द्वारा प्रहलाद चा के भावनात्मक सफर को जीवंत रूप से पर्दे पर लाने का श्रेय दिया जाना चाहिए। उनके शरीर की भाषा में सूक्ष्म परिवर्तन, कमजोर पलों में उनकी आवाज का कांपना, यह सब उनके अभिनय में सच्चाई और गहराई लाने का काम करते हैं। इस भावनात्मक उतार-चढ़ाव ने न केवल प्रहलाद के चरित्र को समृद्ध बनाया बल्कि पंचायत सीजन 3 की पूरी कहानी को भी ऊपर उठाया। इसने दर्शकों की प्रहलाद के बारे में पहले से बनी धारणा को चुनौती दी, जो एक आयामी किरदार लगता था। उन्होंने एक जटिल व्यक्ति का खुलासा किया, जो महत्वाकांक्षा, अकेलेपन और करुणा की बढ़ती भावना से जूझ रहा है। प्रहलाद के रूपांतरण में, हमने पंचायत के केंद्र में मानवीय तत्व को देखा, जो हमें याद दिलाता है कि छोटे शहर की राजनीति और विचित्र किरदारों के दिखावे के नीचे प्रेम, हानि और अपनेपन की निरंतर खोज ही नई कहानियां गढ़ते रहने का संबल देती है।

सचिवजी, प्रधानजी, रिंकी, विकास, भूषण, विनोद और बाकी किरदारों ने भी अपने किरदार के साथ न्याय किया है। आपको कौन सा किरदार पसंद आया बताइएगा।

राहुल मिश्रा
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश 

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osama malik, Santosh Vishwakarma
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8 Comments
Larry
Santosh Vishwakarma
2024-06-03 at 10:12 AM

सारे किरदार बहुत शानदार हैं लगता ही नहीं ये एक्टिंग है 💕
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Larry
Pragati Chand
2024-06-02 at 11:46 PM

प्रह्लाद चा के किरदार का बखान बखूबी किया है आपने, आपने पंचायत को बहुत करीब से समझा है, ये आपके एक- शब्द बयां कर रहे👌👌
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Larry
Ravinder Rangdhar
2024-06-01 at 05:46 PM

बेहद खूबसूरत और सधी हुई समीक्षा! अपनी समीक्षा के माध्यम से आपने दृश्यों और चरित्रों को जीवंत कर दिया। बधाई!
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Larry
Radha Pandey
2024-06-01 at 12:58 PM

Fufaji.. Aapne bahut accha aur satik likha gain👌💕
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Larry
Dr C B Pandey
2024-06-01 at 11:58 AM

Very nice
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