मुर्गा महासभा: संकट टल गया, या अब असली संकट शुरू

मुर्गा महासभा: संकट टल गया, या अब असली संकट शुरू

"मुर्गा महासभा: संकट टल गया, या अब असली संकट शुरू?"
(एक अप्रकाशित रिपोर्ट मीटिंग स्टाइलिश मुर्गा एसोसिएशन ऑफ इंडिया से)

स्थान: गोदाम के पीछे वाली टूटी बांस की टंकी
समय: बर्ड फ्लू खत्म होने की खबर आने के ठीक दो घंटे बाद

जैसे ही न्यूज़ चैनलों ने चीख-चीखकर बताया कि "बर्ड फ्लू अब खत्म हो चुका है, चिकन फिर से मेन्यू पर है!" तो मुर्गा समाज में मातम छा गया।

"भाइयों, अब देखिए अब सिर्फ बर्ड फ्लू नहीं गया, समझिए हमारी प्रोटेक्शन चली गई है!" मुर्गा अध्यक्ष 'कड़कनाथ' ने फटी आवाज़ में घोषणा की।

बैठक में शामिल अनुभवी मुर्गे बोले कि
"जब बर्ड फ्लू था, तो हम मुर्गे इंसान की नज़रों में बीमारी थे। अब हम फिर से ‘डिश ऑफ द डे’ बन चुके हैं।"

मीटिंग में एक युवा मुर्गा उठा जिनका नाम 'ब्रोइलर बॉबी' था।
वो बोला: "इतने दिन से हम छतों पर घूमते थे, रील बनाते थे, नाचते मटकते थे। आदमी दूर से हाथ जोड़कर भागता था। अब वही आदमी नमक-मिर्च के साथ आने वाला है!"

एक अनुभवी बुज़ुर्ग बोले: “बर्ड फ्लू हमारे लिए बीमारी नहीं थी, बल्कि सुरक्षा कवच था। हमें मारा नहीं जाता था, हमें सहानुभूति मिलती थी। बच्चे हमें देखकर कहते थे कि ‘बचाओ मुर्गा चाचा को कोरोना जैसा कुछ हो गया है।’ अब बच्चे भी कहेंगे कि ‘पकाओ, मम्मी मुझे लेग पीस चाहिए।’”

मीटिंग का एजेंडा अब नया था कि कैसे बचें अब जब बचाने वाला रोग चला गया है?
प्रस्ताव पास हुए:
1. मुर्गा संघ UN में अपील करेगा कि “Chicken Lives Matter” नाम से नया कैंपेन शुरू किया जाए।
2. सभी मुर्गों को आत्मरक्षा के लिए “कांटा-क्लासेस” में दाखिला दिलाया जाएगा।
3. हर मुर्गे को अपने जीवन में कम से कम 10 बार अपनी मर्जी से बर्ड फ्लू हो जाने का प्रमाण पत्र मिलेगा।
4. हर मुर्गे का आधार कार्ड बनेगा ताकि उसे कम से कम 2 साल तक किसी बिना डरे घूमने की आजादी मिल सके।
5. अब से सभी मुर्गे सुबह 5 की बजाय 7 बजे कूकेंगे ताकि लोग नींद में गुस्से में ना आ जाएं।
6. और सबसे अहम बात ये कि एक बर्ड यूनियन ऐप बनाया जाए जिसमें GPS हो, ताकि पता चल सके कि कसाई अभी किस गली में घूम रहा है।

बैठक के अंत में, एक तगड़ा पंच आया

"हमें इंसानों से कोई गिला नहीं। पर हे बर्ड फ्लू, तू ही हमारा दोस्त था। तूने हमें जीने दिया, इंसानों ने तो हमेशा तला ही है।"

सभी मुर्गों ने एक सुर में दुखी होकर कूका “कूकड़-कू! अब तो चटनी भी साथ लाएगा तू!”

और तभी पास से आवाज़ आई, “ओ भइया, दो किलो चिकन काट देना, फ्रेश चाहिए।”

मीटिंग बिना समापन के भंग हो गई। सभी मुर्गे झाड़ियों की तरफ भाग गए और पीछे रह गया बस बर्ड फ्लू का पोस्टर।

राहुल मिश्रा
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

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