समोसे का मानकीकरण: एक राष्ट्रीय चिंता

पूरे भारतवर्ष की सबसे ज्वलंत समस्या पर आज संसद में एक सवाल उठा है। मुद्दा गंभीर है समोसे का आकार, आयतन और वजन।

पूरे भारतवर्ष की सबसे ज्वलंत समस्या पर आज संसद में एक सवाल उठा है। मुद्दा गंभीर है समोसे का आकार, आयतन और वजन।

कोई गोरखपुर में समोसा खाता है तो उसका आयतन का परिमाप और भार, लखनऊ के समोसे से भिन्न होता है। यूं कहे कि मथुरा में मिलने वाले गोल पेड़े का आयातन πr²h जहां r त्रिज्या hai और h उसकी मोटाई होगी वह बनारस में मिलने वाले पेड़े से भिन्न है।

समोसे का आयतन निकालने का फॉर्मूला खोज रहा हूँ। कोई जानकर मदद करे। मुद्दे पर वापस आते हैं क्या किसी वस्तु का आयतन या वजन निर्धारित कर देने वस्तु की गुणवत्ता, स्वच्छता और मूल्य का सर्वनिर्धारण किया जा सकता है।

सांसद जी के आधार पर समोसे बनाने का एक स्टैंडर्ड ऑपरेशन प्रोसीजर होना चाहिए जो एक विस्तृत, चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका हो, जो स्थिरता, गुणवत्ता और दक्षता सुनिश्चित करें। जो यह तय करे कि समोसे बनाने का क्या सांचा हो, उसमें आलू कितने ग्राम पड़े, मसालों की क्या मात्रा हो, बाकी सामग्रियों की क्या माप हो। साथ ही तेल किस क्वालिटी का इस्तेमाल हो।

समोसे में भी तो कई वैरायटी है जैसे बड़ा समोसा, छोटा समोसा, आलू समोसा, आलू मटर समोसा, आलू पनीर समोसा, आलू मूंगफली समोसा। बंगाल में सिंघाड़ा, मध्य प्रदेश में कड़ी समोसा। अब समोसा से साथ चटनी में धनिया चटनी, इमली चटनी, पुदीना चटनी या फिर मिर्च।

अब इतने बड़े देश में जहां पलक झपकते पानी, वाणी और व्यंजन बदल जाते ऐसे देश में इस तरह के एक रुपता के गुंजाइश पर बहस क्या सार्थक है।

बाकी बातें कमेंट में करते हैं।

राहुल मिश्रा

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

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