सैयारा को छोड़िए और जाकर देखिए होम्बाले फ़िल्म्स निर्मित महावतार नरसिम्हा। सच पूछिए तो मैने अपने जीवनकाल में भारतीय प्रोडक्शन हाउस में इससे बेहतर एनीमेशन मूवी नहीं देखी हैं।
ऐसे मूवी की उम्मीद दक्षिण भारत से ही लगाया भी जा सकता है क्योंकि बॉलीवुड ने तो हमारे सनातन धर्म, पुराणों और महाकाव्यों से जुड़ी फिल्मों में अपने फालतू के मसाले लगाने के अलावा कुछ नहीं किया है। उदाहरण है आदिपुरुष। बॉलीवुड को सीखना चाहिए उनसे कि कैसे किसी पौराणिक कथाओं को हूबहू उतार कर भी उसमें बहुत से कथ्य, डायलॉग और म्यूजिक से भरपुर सजाया जा सकता है।
मैं बहुत जल्दी मूवी देखता ही नहीं हूं, समय बर्बादी लगता है। इस फिल्म ने मुझे इसलिए नहीं प्रभावित किया कि इस फिल्म का सिर्फ एक पक्ष अच्छा है और कथा हु ब हु रही। बल्कि इसके एक्शन सीन, एनीमेशन, बैकग्राउंड म्यूजिक, वी एफ सी, मंत्रोचारण और डायलॉग बहुत ही सधे हुए और बेहतरीन थे। वो आखिरी के हिरण्यकश्य के वध वाला पूरा सेटअप गजब का लगा।
आमतौर पर भारतीय एनीमेशन मूवी कार्टून जैसी लगती है। पर इस मूवी ने सारे प्रश्नचिन्ह को एक झटके में खत्म कर दिया है। सुने में आया है उन्होंने ये पहली किश्त दिखाई है ऐसे महावतार के आगे और भी फिल्में आएंगी।

डायरेक्टर अश्विन कुमार जी सहित पूरी टीम को ढेरो बधाई और शुभकामनाएं। ऐसी फिल्में विश्व को भी बताती है कि भारतीय फिल्म उद्योग भी रचनात्मकता, कल्पनाशीलता और नवाचार में किसी से पीछे नहीं है।
राहुल मिश्रा
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश